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mahabharat 3.300.6: महाराज! कुंडल के संबंध में देवराज इंद्र की भावना जानकर भगवान सूर्य कर्ण के पास गए। 6॥   |   mahabharat अध्याय 3.300: सूर्यका स्वप्नमें कर्णको दर्शन देकर उसे इन्द्रको कुण्डल और कवच न देनेके लिये सचेत करना तथा कर्णका आग्रहपूर्वक कुण्डल और कवच देनेका ही निश्चय रखना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 300: सूर्यका स्वप्नमें कर्णको दर्शन देकर उसे इन्द्रको कुण्डल और कवच न देनेके लिये सचेत करना तथा कर्णका आग्रहपूर्वक कुण्डल और कवच देनेका ही निश्चय रखना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.300.6 
अभिप्रायमथो ज्ञात्वा महेन्द्रस्य विभावसु:।
कुण्डलार्थे महाराज सूर्य: कर्णमुपागत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! कुंडल के संबंध में देवराज इंद्र की भावना जानकर भगवान सूर्य कर्ण के पास गए। 6॥
 
Maharaj! Lord Surya went to Karna after knowing the feelings of Devraj Indra regarding the Kundal. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)