Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.300.39: इसलिए देव! इस प्रकार के व्रत का पालन करके मैं ब्राह्मण रूप धारण करके इन्द्र को यह उत्तम भिक्षा देकर संसार में उत्तम गति को प्राप्त करूँगा॥39॥ | mahabharat अध्याय 3.300: सूर्यका स्वप्नमें कर्णको दर्शन देकर उसे इन्द्रको कुण्डल और कवच न देनेके लिये सचेत करना तथा कर्णका आग्रहपूर्वक कुण्डल और कवच देनेका ही निश्चय रखना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसलिए देव! इस प्रकार के व्रत का पालन करके मैं ब्राह्मण रूप धारण करके इन्द्र को यह उत्तम भिक्षा देकर संसार में उत्तम गति को प्राप्त करूँगा॥39॥
That's why Dev! By observing this type of fast, I will attain the best path in the world by giving this supreme alms to Indra in the form of a Brahmin. 39॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि कुण्डलाहरणपर्वणि सूर्यकर्णसंवादे त्रिशततमोऽध्याय:॥ ३००॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत कुण्डलाहरणपर्वमें सूर्यकर्णसंवादविषयक तीन सौवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३००॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥