Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.300.31: अतः सूर्यदेव! मैं प्राण त्यागकर भी संसार में यश बढ़ाऊँगा। सिद्ध पुरुष स्वर्ग का सुख भोगता है। जिसका यश नष्ट हो जाता है, वह स्वयं नष्ट हो जाता है। 31॥ | mahabharat अध्याय 3.300: सूर्यका स्वप्नमें कर्णको दर्शन देकर उसे इन्द्रको कुण्डल और कवच न देनेके लिये सचेत करना तथा कर्णका आग्रहपूर्वक कुण्डल और कवच देनेका ही निश्चय रखना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः सूर्यदेव! मैं प्राण त्यागकर भी संसार में यश बढ़ाऊँगा। सिद्ध पुरुष स्वर्ग का सुख भोगता है। जिसका यश नष्ट हो जाता है, वह स्वयं नष्ट हो जाता है। 31॥
So Suryadev! I will bring glory to the world even by giving up my life. An accomplished man enjoys the happiness of heaven. One whose fame is destroyed is himself destroyed. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥