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mahabharat 3.300.30: यदि पाण्डवों के हित के लिए इन्द्र मेरे कुण्डल मांगने आएगा तो इससे संसार में मेरी कीर्ति बढ़ेगी और वह अपयश पाएगा ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 3.300: सूर्यका स्वप्नमें कर्णको दर्शन देकर उसे इन्द्रको कुण्डल और कवच न देनेके लिये सचेत करना तथा कर्णका आग्रहपूर्वक कुण्डल और कवच देनेका ही निश्चय रखना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 300: सूर्यका स्वप्नमें कर्णको दर्शन देकर उसे इन्द्रको कुण्डल और कवच न देनेके लिये सचेत करना तथा कर्णका आग्रहपूर्वक कुण्डल और कवच देनेका ही निश्चय रखना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.300.30 
हितार्थं पाण्डुपुत्राणां कुण्डले मे प्रयाचितुम्।
तन्मे कीर्तिकरं लोके तस्याकीर्तिर्भविष्यति॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
यदि पाण्डवों के हित के लिए इन्द्र मेरे कुण्डल मांगने आएगा तो इससे संसार में मेरी कीर्ति बढ़ेगी और वह अपयश पाएगा ॥30॥
 
If Indra comes to ask for my earrings for the benefit of the Pandavas, this will increase my fame in the world and he will be disgraced. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)