Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.300.24: हे प्रभु! आप वर देने वाले देवता हैं। मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप प्रसन्न रहें और प्रेमपूर्वक कहें कि यदि मैं आपको प्रिय हूँ तो कृपया मुझे इस व्रत से न रोकें॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 3.300: सूर्यका स्वप्नमें कर्णको दर्शन देकर उसे इन्द्रको कुण्डल और कवच न देनेके लिये सचेत करना तथा कर्णका आग्रहपूर्वक कुण्डल और कवच देनेका ही निश्चय रखना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रसादये त्वां वरदं प्रणयाच्च ब्रवीम्यहम्।
न निवार्यो व्रतादस्मादहं यद्यस्मि ते प्रिय:॥ २४॥
अनुवाद
हे प्रभु! आप वर देने वाले देवता हैं। मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप प्रसन्न रहें और प्रेमपूर्वक कहें कि यदि मैं आपको प्रिय हूँ तो कृपया मुझे इस व्रत से न रोकें॥ 24॥
Lord! You are the God who bestows boons. I request you to remain pleased and lovingly say that if I am dear to you then please do not deter me from this fast.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥