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mahabharat 3.300.12: वे आपकी उदारता से परिचित हैं और सारा जगत आपके इस नियम को जानता है कि जब कोई सज्जन व्यक्ति आपसे कुछ मांगता है, तो आप उसे सदैव उसकी इच्छित वस्तु देते हैं और उससे कभी कुछ नहीं मांगते॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.300: सूर्यका स्वप्नमें कर्णको दर्शन देकर उसे इन्द्रको कुण्डल और कवच न देनेके लिये सचेत करना तथा कर्णका आग्रहपूर्वक कुण्डल और कवच देनेका ही निश्चय रखना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 300: सूर्यका स्वप्नमें कर्णको दर्शन देकर उसे इन्द्रको कुण्डल और कवच न देनेके लिये सचेत करना तथा कर्णका आग्रहपूर्वक कुण्डल और कवच देनेका ही निश्चय रखना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.300.12 
विदितं तेन शीलं ते सर्वस्य जगतस्तथा।
यथा त्वं भिक्षित: सद्भिर्ददास्येव न याचसे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वे आपकी उदारता से परिचित हैं और सारा जगत आपके इस नियम को जानता है कि जब कोई सज्जन व्यक्ति आपसे कुछ मांगता है, तो आप उसे सदैव उसकी इच्छित वस्तु देते हैं और उससे कभी कुछ नहीं मांगते॥12॥
 
They are aware of your generosity and the entire world knows about your rule that when a good man asks for something, you always give him the thing he desires and never ask him for anything.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)