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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 30: दु:खसे मोहित द्रौपदीका युधिष्ठिरकी बुद्धि, धर्म एवं ईश्वरके न्यायपर आक्षेप
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श्लोक 42
श्लोक
3.30.42
कर्म चेत् कृतमन्वेति कर्तारं नान्यमृच्छति।
कर्मणा तेन पापेन लिप्यते नूनमीश्वर:॥ ४२॥
अनुवाद
यदि किए हुए कर्म केवल कर्ता के ही पीछे चलते हैं और किसी अन्य के पास नहीं जाते, तो उन पापकर्मों में भगवान् भी अवश्य सम्मिलित होंगे ॥ 42॥
If the deeds performed follow only the doer and do not go to anyone else, then even God will surely be involved in those sinful deeds. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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