श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 30: दु:खसे मोहित द्रौपदीका युधिष्ठिरकी बुद्धि, धर्म एवं ईश्वरके न्यायपर आक्षेप  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.30.37 
सम्प्रयोज्य वियोज्यायं कामकारकर: प्रभु:।
क्रीडते भगवान् भूतैर्बाल: क्रीडनकैरिव॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जैसे बालक खिलौनों से खेलता है, वैसे ही अपनी इच्छानुसार नाना प्रकार के कार्य करने वाले सर्वशक्तिमान भगवान् सब जीवों को एक दूसरे से अलग करके तथा एक दूसरे से जोड़कर उनके साथ लीला करते रहते हैं ॥ 37॥
 
Just as a child plays with toys, similarly the all-powerful Lord, who performs various activities as per His will, keeps on performing His pastimes with all living beings by bringing them together and separating them from each other. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)