यथा काष्ठेन वा काष्ठमश्मानं चाश्मना पुन:।
अयसा चाप्ययश्छिन्द्यान्निर्विचेष्टमचेतनम्॥ ३५॥
एवं स भगवान् देव: स्वयम्भू: प्रपितामह:।
हिनस्ति भूतैर्भूतानि च्छद्म कृत्वा युधिष्ठिर॥ ३६॥
अनुवाद
महाराज युधिष्ठिर! जिस प्रकार मनुष्य अचेतन एवं निष्क्रिय लकड़ी, पत्थर और लोहे को लकड़ी, पत्थर और लोहे की सहायता से ही काट डालता है, उसी प्रकार सबके पूर्वज स्वयंभू भगवान श्रीहरि माया का आवरण धारण करके प्राणियों की सहायता से ही प्राणियों का नाश करते हैं।
Maharaj Yudhishthira! Just as a man cuts unconscious and inactive wood, stone and iron with the help of wood, stone and iron only, in the same way the self-born Lord Shri Hari, the forefather of all, destroys creatures with the help of creatures only, taking the cover of Maya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)