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mahabharat 3.30.29: हे भारत! जिस प्रकार छोटे-छोटे तिनके शक्तिशाली वायु के वश में होकर उड़ते और चलते हैं, उसी प्रकार समस्त प्राणी भगवान के वश में होकर चलते और चलते हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.30: दु:खसे मोहित द्रौपदीका युधिष्ठिरकी बुद्धि, धर्म एवं ईश्वरके न्यायपर आक्षेप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.30.29 
यथा वायोस्तृणाग्राणि वशं यान्ति बलीयस:।
धातुरेवं वशं यान्ति सर्वभूतानि भारत॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! जिस प्रकार छोटे-छोटे तिनके शक्तिशाली वायु के वश में होकर उड़ते और चलते हैं, उसी प्रकार समस्त प्राणी भगवान के वश में होकर चलते और चलते हैं।
 
Bharat! Just as tiny straws fly and move under the control of the powerful wind, in the same way all creatures move and move under the control of God.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)