Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.30.25: आत्मा स्वतंत्र नहीं है, वह रस्सी से बंधे पक्षी की तरह कर्म के बंधन में बंधा हुआ है। वह केवल ईश्वर के अधीन है। उसका न दूसरों पर, न स्वयं पर ही नियंत्रण है॥25॥ | mahabharat अध्याय 3.30: दु:खसे मोहित द्रौपदीका युधिष्ठिरकी बुद्धि, धर्म एवं ईश्वरके न्यायपर आक्षेप । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शकुनिस्तन्तुबद्धो वा नियतोऽयमनीश्वर:।
ईश्वरस्य वशे तिष्ठेन्नान्येषां नात्मन: प्रभु:॥ २५॥
अनुवाद
आत्मा स्वतंत्र नहीं है, वह रस्सी से बंधे पक्षी की तरह कर्म के बंधन में बंधा हुआ है। वह केवल ईश्वर के अधीन है। उसका न दूसरों पर, न स्वयं पर ही नियंत्रण है॥25॥
The soul is not independent, it is bound by the bondage of karma like a bird tied to a string. It is under the control of God only. It has no control over others, nor over itself.॥25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥