श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 30: दु:खसे मोहित द्रौपदीका युधिष्ठिरकी बुद्धि, धर्म एवं ईश्वरके न्यायपर आक्षेप  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.30.23 
यथा दारुमयी योषा नरवीर समाहिता।
ईरयत्यङ्गमङ्गानि तथा राजन्निमा: प्रजा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे वीर पुरुषोत्तम! जैसे कठपुतली तार वाले बाजों की प्रेरणा से अपने अंग-प्रत्यंग हिलाती है, वैसे ही ये सब लोग भगवान की प्रेरणा से अपने हाथ-पैर आदि से नाना प्रकार के कर्म करते हैं।
 
O valiant king of men! Just as a puppet moves its limbs under the inspiration of a stringed instrument, similarly all these people, under the inspiration of God, perform various actions with their hands, feet, etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)