श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 30: दु:खसे मोहित द्रौपदीका युधिष्ठिरकी बुद्धि, धर्म एवं ईश्वरके न्यायपर आक्षेप  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.30.22 
धातैव खलु भूतानां सुखदु:खे प्रियाप्रिये।
दधाति सर्वमीशान: पुरस्ताच्छुक्रमुच्चरन्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
सृष्टिकर्ता ईश्वर ही सबके पूर्वकर्मों के अनुसार जीवों के लिए सुख-दुःख, रुचि-अरुचि की व्यवस्था करता है ॥22॥
 
It is God the creator who arranges happiness-sorrow, like-dislike for the living beings according to everyone's previous deeds. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)