श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 30: दु:खसे मोहित द्रौपदीका युधिष्ठिरकी बुद्धि, धर्म एवं ईश्वरके न्यायपर आक्षेप  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.30.19 
ऋजोर्मृदोर्वदान्यस्य ह्रीमत: सत्यवादिन:।
कथमक्षव्यसनजा बुद्धिरापतिता तव॥ १९॥
 
 
अनुवाद
आप सरल, सौम्य, उदार, विनीत और सत्यनिष्ठ हैं। मैं नहीं जानता कि आपका मन जुए में कैसे आसक्त हो गया॥19॥
 
You are simple, gentle, generous, modest and truthful. I don't know how your mind got addicted to gambling.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)