श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 299: शाल्वदेशकी प्रजाके अनुरोधसे महाराज द्युमत्सेनका राज्याभिषेक कराना तथा सावित्रीको सौ पुत्रों और सौ भाइयोंकी प्राप्ति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.299.6 
अनेन निश्चयेनेह वयं प्रस्थापिता नृप।
प्राप्तानीमानि यानानि चतुरङ्गं च ते बलम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'नरेश्वर! इसी निश्चय से हम यहाँ भेजे गए हैं। ये वाहन उपस्थित हैं और आपकी चतुरंगिणी सेना भी सेवा के लिए उपस्थित है।'॥6॥
 
‘Nareshwar! We have been sent here with this determination. These vehicles are present and your four-fold army is also present for service.'॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)