श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.298.9 
पुनरुक्त्वा च करुणां वाचं तौ शोककर्शितौ।
हा पुत्र हा साध्वि वधू: क्वासि क्वासीत्यरोदताम्।
ब्राह्मण: सत्यवाक् तेषामुवाचेदं तयोर्वच:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
शोक से पीड़ित दम्पति बार-बार विलाप करते हुए करुण वचन कहने लगे - ‘हे पुत्र! हे पतिव्रता पुत्रवधू! तुम कहाँ हो, कहाँ हो?’ उस समय एक सत्यनिष्ठ ब्राह्मण उनसे इस प्रकार बोला॥9॥
 
The grief-stricken couple started crying repeatedly, uttering pitiful words, 'Oh son! Oh virtuous daughter-in-law! Where are you, where are you?' At that time a truthful Brahmin spoke to them thus.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)