श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.298.42 
एतत् सर्वं मयाऽऽख्यातं कारणं विस्तरेण व:।
यथावृत्तं सुखोदर्कमिदं दु:खं महन्मम॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने अपने विलम्ब से आने का कारण और उसकी सच्ची कथा तुमसे कह सुनाई है। मैंने जो महान् कष्ट सहे हैं, उनका परिणाम अंततः सुख ही हुआ है ॥ 42॥
 
In this manner I have explained to you the reason for my delay in coming and the true story of it. The great suffering I have had to endure has ultimately resulted in happiness. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)