Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.298.40: मैंने अपने ससुर के लिए दो वरदान प्राप्त किए हैं - आँखों की रोशनी और राज्य। इसके अलावा, मैंने दो और वरदान प्राप्त किए हैं - अपने पिता के लिए सौ पुत्र और अपने लिए सौ पुत्र। | mahabharat अध्याय 3.298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चक्षुषी च स्वराज्यं च द्वौ वरौ श्वशुरस्य मे।
लब्धं पितु: पुत्रशतं पुत्राणां चात्मन: शतम्॥ ४०॥
अनुवाद
मैंने अपने ससुर के लिए दो वरदान प्राप्त किए हैं - आँखों की रोशनी और राज्य। इसके अलावा, मैंने दो और वरदान प्राप्त किए हैं - अपने पिता के लिए सौ पुत्र और अपने लिए सौ पुत्र।
I have received two boons for my father-in-law - the regaining of eyesight and my kingdom. Besides this, I have received two more boons - a hundred sons for my father and a hundred sons for myself.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥