श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.298.4 
श्रुत्वा शब्दं तु यं कञ्चिदुन्मुखौ सुतशङ्कया।
सावित्रीसहितोऽभ्येति सत्यवानित्यभाषताम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जो कुछ शब्द उन्होंने सुना, उसी से वे अपने पुत्र के आगमन के लिए चिन्तित हो उठीं और एक-दूसरे से कहने लगीं, ‘सत्यवान सावित्री के साथ आ रहा है।’ ॥4॥
 
Whatever word they heard, they became anxious about the arrival of their son and started saying to each other, 'Satyavan is coming with Savitri.' ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)