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mahabharat 3.298.39: उस समय मैंने सत्य वचनों से यमराज की स्तुति की थी। तब उन्होंने मुझे पाँच वरदान दिए। कृपया मुझसे उन वरदानों को सुनिए।   |   mahabharat अध्याय 3.298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.298.39 
अस्तौषं तमहं देवं सत्येन वचसा विभुम्।
पञ्च वै तेन मे दत्ता वरा: शृणुत तान् मम॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
उस समय मैंने सत्य वचनों से यमराज की स्तुति की थी। तब उन्होंने मुझे पाँच वरदान दिए। कृपया मुझसे उन वरदानों को सुनिए।
 
At that time I praised Lord Yama with truthful words. Then he gave me five boons. Please listen to those boons from me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)