श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.298.37 
मृत्युर्मे पत्युराख्यातो नारदेन महात्मना।
स चाद्य दिवस: प्राप्तस्ततो नैनं जहाम्यहम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
महात्मा नारदजी ने मुझे मेरे पति की मृत्यु के बारे में बताया था। आज उनकी मृत्यु का दिन आ गया था; इसलिए मैंने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। 37.
 
Mahatma Naradji had told me about my husband's death. That day of death had come today; that is why I did not leave him alone. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)