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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.298.36 
सावित्र्युवाच
एवमेतद् यथा वेत्थ संकल्पो नान्यथा हि व:।
न हि किंचिद् रहस्यं मे श्रूयतां तथ्यमेव यत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
सावित्री बोली - मुनीश्वर! आप जो उचित समझें, वही उचित है। आपका निर्णय अन्यथा नहीं हो सकता। मेरे लिए छिपाने को कुछ भी नहीं है। मैं आपको सारा घटनाक्रम विस्तारपूर्वक बताऊँगी, कृपया सुनें।
 
Savitri said - Munishwar! Whatever you think is right. Your decision cannot be otherwise. There is nothing for me to hide. I will tell you all the events in detail, please listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)