श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  3.298.34-35 
श्रोतुमिच्छामि सावित्रि त्वं हि वेत्थ परावरम्।
त्वां हि जानामि सावित्रि सावित्रीमिव तेजसा॥ ३४॥
त्वमत्र हेतुं जानीषे तस्मात् सत्यं निरुच्यताम्।
रहस्यं यदि ते नास्ति किंचिदत्र वदस्व न:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
सावित्री! मैं तुमसे रहस्य सुनना चाहता हूँ, क्योंकि तुम भूत और भविष्य के बारे में सब कुछ जानती हो। मैं जानता हूँ कि तुम सावित्री देवी के समान तेजस्वी हो। तुम जानती हो कि राजा को अचानक दृष्टि क्यों प्राप्त हुई है। मुझे सच-सच बताओ। यदि इसमें कुछ छिपाने योग्य न हो, तो हमें भी बताओ। ॥34-35॥
 
Savitri! I want to hear the secret from you because you know everything about the past and the future. I know you to be as radiant as Savitri Devi. You know the reason why the king has suddenly gained sight. Tell me the truth. If there is nothing to hide in this, then do tell us. ॥ 34-35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)