श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.298.33 
गौतम उवाच
अकस्माच्चक्षुष: प्राप्तिर्द्युमत्सेनस्य ते पितु:।
नास्य त्वं कारणं वेत्सि सावित्री वक्तुमर्हति॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
गौतम ने कहा, "तुम नहीं जानते कि तुम्हारे पिता द्युमत्सेन को अचानक दृष्टि क्यों प्राप्त हो गई। शायद सावित्री तुम्हें बता सके।"
 
Gautama said, "You do not know the reason why your father Dyumatsena has suddenly acquired sight. Perhaps Savitri can tell you."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)