श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.298.32 
सर्वेषामेव भवतां संतापो मा भवेदिति।
अतो विरात्रागमनं नान्यदस्तीह कारणम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मैं इतनी देर रात यहाँ इसलिए आया हूँ ताकि आप सब को मेरी चिंता न हो। इस देरी का और कोई कारण नहीं है। 32.
 
After waking up, I came here so late in the night so that you all don't have to worry about me. There is no other reason for this delay. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)