श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.298.31 
सुप्तश्चाहं वेदनया चिरमित्युपलक्षये।
तावत् कालं न च मया सुप्तपूर्वं कदाचन॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
मुझे लगता है कि मैं दर्द से इतना परेशान था कि मैं बहुत देर तक सोता रहा। इससे पहले मैं कभी इतनी देर तक नहीं सोया था।
 
I think I was so tormented by the pain that I slept for a long time. I had never slept for that long before that.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)