श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.298.30 
सत्यवानुवाच
पित्राहमभ्यनुज्ञात: सावित्रीसहितो गत:।
अथ मेऽभूच्छिरोदु:खं वने काष्ठानि भिन्दत:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
सत्यवान बोले - पिता से अनुमति लेकर मैं सावित्री के साथ वन में गया था। तब वन में लकड़ियाँ काटते समय मेरे सिर में भयंकर दर्द होने लगा।
 
Satyavan said - After taking permission from my father, I went to the forest with Savitri. Then while chopping wood in the forest, I started having severe headache. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)