श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.298.29 
संतापित: पिता माता वयं चैव नृपात्मज।
कस्मादिति न जानीमस्तत् सर्वं वक्तुमर्हसि॥ २९॥
 
 
अनुवाद
राजकुमार! देर करके तुमने अपने माता-पिता और हम सबको बड़ी मुसीबत में डाल दिया है। तुमने ऐसा क्यों किया? हम यह नहीं जान सकते, इसलिए हमें सब कुछ साफ़-साफ़ बताओ।
 
Prince! By delaying your arrival, you had put your parents and us in great distress. Why did you do this? We are unable to know this, so tell us everything clearly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)