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mahabharat 3.298.28: ऋषि बोले—राजकुमार! तुम अपनी पत्नी के साथ पहले क्यों नहीं आए? इतनी रात को क्यों आए? तुम्हें क्या कष्ट हुआ?॥28॥   |   mahabharat अध्याय 3.298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.298.28 
ऋषय ऊचु:
प्रागेव नागतं कस्मात् सभार्येण त्वया विभो।
विरात्रे चागतं कस्मात् कोऽनुबन्धस्तवाभवत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
ऋषि बोले—राजकुमार! तुम अपनी पत्नी के साथ पहले क्यों नहीं आए? इतनी रात को क्यों आए? तुम्हें क्या कष्ट हुआ?॥28॥
 
The sage said—Prince! Why did you not come with your wife earlier? Why did you come so late at night? What difficulty did you face?॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)