श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.298.26 
शैब्या च सत्यवांश्चैव सावित्री चैकत: स्थिता:।
सर्वैस्तैरभ्यनुज्ञाता विशोका: समुपाविशन्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
शैब्य, सत्यवान और सावित्री- ये तीनों भी एक ओर खड़े थे, जो उन सब महापुरुषों की आज्ञा पाकर बिना किसी शोक के बैठ गये।
 
Shaibya, Satyavan and Savitri - these three were also standing on one side, who after getting the permission of all those great men sat down without any grief. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)