श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.298.25 
ततोऽग्निं तत्र संज्वाल्य द्विजास्ते सर्व एव हि।
उपासांचक्रिरे पार्थ द्युमत्सेनं महीपतिम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! तत्पश्चात सभी ब्राह्मण वहाँ अग्नि जलाकर राजा द्युमत्सेन के पास बैठ गए॥25॥
 
Yudhisthira! Thereafter, all the Brahmins lit a fire there and sat near King Dyumatsen. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)