श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.298.20 
मार्कण्डेय उवाच
एवमाश्वासितस्तैस्तु सत्यवाग्भिस्तपस्विभि:।
तांस्तान् विगणयन् सर्वांस्तत: स्थिर इवाभवत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय कहते हैं - युधिष्ठिर! जब सत्यवादी एवं तपस्वी ऋषियों ने राजा द्युमत्सेन को इस प्रकार पूर्ण आश्वासन दिया, तब उन्होंने उन सबका आदर किया और उनकी बातें स्वीकार कर लीं तथा शांत हो गये।
 
Mārkaṇḍeya says - Yudhishthir! When the truthful and ascetic sages thus assured King Dyumatsena completely, then he respected them all and accepted their words and became composed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)