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mahabharat 3.298.19: धौम्य बोले- महाराज! जिस प्रकार आपका पुत्र सर्वगुण संपन्न, यशस्वी और दीर्घायु पुरुष के लक्षणों से युक्त है, उसी प्रकार यह मानना ​​चाहिए कि सत्यवान् जीवित है।   |   mahabharat अध्याय 3.298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.298.19 
धौम्य उवाच
सर्वैर्गुणैरुपेतस्ते यथा पुत्रो जनप्रिय:।
दीर्घायुर्लक्षणोपेतस्तथा जीवति सत्यवान्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
धौम्य बोले- महाराज! जिस प्रकार आपका पुत्र सर्वगुण संपन्न, यशस्वी और दीर्घायु पुरुष के लक्षणों से युक्त है, उसी प्रकार यह मानना ​​चाहिए कि सत्यवान् जीवित है।
 
Dhaumya said- Maharaj! According to the way your son is full of all virtues, popular and has the characteristics of a long-lived man, it should be believed that Satyavan is alive. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)