श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.298.18 
आपस्तम्ब उवाच
यथा वदन्ति शान्तायां दिशि वै मृगपक्षिण:।
पार्थिवी च प्रवृत्तिस्ते तथा जीवति सत्यवान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
आपस्तम्ब बोले - इस शान्त (और सुखद) दिशा में मृगों और पक्षियों का शब्द सुनाई दे रहा है और जिस प्रकार तुम राजा के योग्य कर्तव्य कर रहे हो, उससे यह कहा जा सकता है कि सत्यवान जीवित है ॥18॥
 
Apastamba said - In this peaceful (and pleasant) direction, the sounds of deer and birds are heard and the way you are performing the duties befitting a king, it can be said that Satyavan is alive. ॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)