श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.298.17 
दाल्भ्य उवाच
यथा दृष्टि: प्रवृत्ता ते सावित्र्याश्च यथा व्रतम्।
गताऽऽहारमकृत्वा च तथा जीवति सत्यवान्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
दाल्भ्य ने कहा, 'हे राजन! जिस प्रकार आपकी दृष्टि वापस आ गई है, जिस प्रकार सावित्री व्रत कर रही है, तथा जिस प्रकार वह आज बिना कुछ खाए-पिए अपने पति के साथ चली गई है, इन सब बातों को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि सत्यवान जीवित है।
 
Dalbhya said, 'O King! The way you have regained your sight, the way Savitri is fasting, and the way she has gone with her husband today without eating anything, considering all these things it seems that Satyavan is alive.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)