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mahabharat 3.298.14: गौतम के शिष्य ने कहा - मेरे गुरुजी के मुख से जो कुछ निकला है, वह कभी मिथ्या नहीं हो सकता। सत्यवान अवश्य जीवित है। 14॥   |   mahabharat अध्याय 3.298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.298.14 
शिष्य उवाच
उपाध्यायस्य मे वक्त्राद् यथा वाक्यं विनि:सृतम्।
नैव जातु भवेन्मिथ्या तथा जीवति सत्यवान्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
गौतम के शिष्य ने कहा - मेरे गुरुजी के मुख से जो कुछ निकला है, वह कभी मिथ्या नहीं हो सकता। सत्यवान अवश्य जीवित है। 14॥
 
Gautam's disciple said - Whatever has come from my Guruji's mouth can never be false. Satyavan is definitely alive. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)