श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.298.10 
सुवर्चा उवाच
यथास्य भार्या सावित्री तपसा च दमेन च।
आचारेण च संयुक्ता तथा जीवति सत्यवान्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सुवर्चा ने कहा - सत्यवान की पत्नी सावित्री को तप, संयम और सदाचार से संपन्न देखकर मैं कह सकता हूँ कि सत्यवान जीवित है॥10॥
 
Suvarcha said - Seeing that Satyavan's wife Savitri is endowed with austerity, self-control and good conduct, I can say that Satyavan is alive.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)