श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 298: पत्नीसहित राजा द्युमत्सेनकी सत्यवान‍्के लिये चिन्ता, ऋषियोंका उन्हें आश्वासन देना, सावित्री और सत्यवान‍्का आगमन तथा सावित्रीद्वारा विलम्बसे आनेके कारणपर प्रकाश डालते हुए वरप्राप्तिका विवरण बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.298.1 
मार्कण्डेय उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु द्युमत्सेनो महाबल:।
लब्धचक्षु: प्रसन्नायां दृष्टॺां सर्वं ददर्श ह॥ १॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय कहते हैं - युधिष्ठिर ! उसी समय महाबली राजा द्युमत्सेन की खोई हुई दृष्टि पुनः आ गई। उनकी दृष्टि स्पष्ट हो गई और वे सब कुछ देखने लगे॥1॥
 
Markandeya says- Yudhishthira! At this very time, the mighty King Dyumatsena regained his lost sight. As his vision became clear, he began to see everything.॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)