Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.297.96-97h: मार्कण्डेयजी कहते हैं- युधिष्ठिर! ऐसा कहकर धर्मात्मा, गुरुभक्त और गुरुजनों के प्रिय सत्यवान् दोनों भुजाएँ उठाकर शोक से भर गए और फूट-फूटकर रोने लगे॥96 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मार्कण्डेयजी कहते हैं- युधिष्ठिर! ऐसा कहकर धर्मात्मा, गुरुभक्त और गुरुजनों के प्रिय सत्यवान् दोनों भुजाएँ उठाकर शोक से भर गए और फूट-फूटकर रोने लगे॥96 1/2॥
Markandeyaji says- Yudhishthir! Having said this, Satyavan, a virtuous person, devotee of Guru and beloved of Gurus, raised both his arms and became filled with grief and started crying bitterly. 96 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥