Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.297.95-96h: मेरे माता-पिता आज मेरे कारण बहुत दुःखी होंगे। मैं केवल इसलिए जीवित हूँ क्योंकि मैं उन्हें जीवित देखता हूँ। मुझे उन दोनों का भरण-पोषण करना है। मैं यह भी जानता हूँ कि अपने माता-पिता से प्रेम करना मेरा कर्तव्य है। ॥95 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मत्कृतेन हि तावद्य सन्तापं परमेष्यत:।
जीवन्तावनुजीवामि भर्तव्यौ तौ मयेति ह॥ ९५॥
तयो: प्रियं मे कर्तव्यमिति जानामि चाप्यहम्।
अनुवाद
मेरे माता-पिता आज मेरे कारण बहुत दुःखी होंगे। मैं केवल इसलिए जीवित हूँ क्योंकि मैं उन्हें जीवित देखता हूँ। मुझे उन दोनों का भरण-पोषण करना है। मैं यह भी जानता हूँ कि अपने माता-पिता से प्रेम करना मेरा कर्तव्य है। ॥95 1/2॥
My parents will be very sad today because of me. I am living only because I see them alive. I have to provide for both of them. I also know that it is my duty to love my parents. ॥95 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥