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mahabharat 3.297.94: शुभ ! मुझे अपने लिए उतना दुःख नहीं है, जितना अपने पिता और उनके पीछे चलने वाली अपनी दुबली-पतली माता के लिए है ॥ 94॥   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  3.297.94 
नात्मानमनुशोचामि यथाहं पितरं शुभे।
भर्तारं चाप्यनुगतां मातरं परिदुर्बलाम्॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
शुभ ! मुझे अपने लिए उतना दुःख नहीं है, जितना अपने पिता और उनके पीछे चलने वाली अपनी दुबली-पतली माता के लिए है ॥ 94॥
 
Shubh! I am not as sad for myself as I am for my father and my skinny mother who followed him. ॥ 94॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)