Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.297.93: अवश्य ही इस समय मेरे अंधे पिता व्याकुल मन से आश्रम के प्रत्येक निवासी के पास जाकर मेरे विषय में पूछ रहे होंगे॥ 93॥   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  3.297.93 
व्यक्तमाकुलया बुद्धॺा प्रज्ञाचक्षु: पिता मम।
एकैकमस्यां वेलायां पृच्छत्याश्रमवासिनम्॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
अवश्य ही इस समय मेरे अंधे पिता व्याकुल मन से आश्रम के प्रत्येक निवासी के पास जाकर मेरे विषय में पूछ रहे होंगे॥ 93॥
 
Surely at this time my blind father, with a troubled heart, would be visiting each and every inmate of the ashram and asking about me.॥ 93॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)