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mahabharat 3.297.79: मैं वहाँ से आग लाकर सारी लकड़ियाँ जला दूँगा। यहाँ बहुत सारा कबाड़ पड़ा है। कृपया अपनी चिंता मन से निकाल दीजिए।   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  3.297.79 
ततोऽग्निमानयित्वेह ज्वालयिष्यामि सर्वत:।
काष्ठानीमानि सन्तीह जहि सन्तापमात्मन:॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
मैं वहाँ से आग लाकर सारी लकड़ियाँ जला दूँगा। यहाँ बहुत सारा कबाड़ पड़ा है। कृपया अपनी चिंता मन से निकाल दीजिए।
 
I will bring fire from there and burn all the wood. There is a lot of junk lying here. Please remove your worries from your mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)