Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.297.74: सुव्रत! उठो, उठो, तुम्हारा कल्याण हो। जाओ और अपने माता-पिता से मिल आओ। सूरज डूब गया है और रात अँधेरी हो गई है।   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  3.297.74 
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ भद्रं ते पितरौ पश्य सुव्रत।
विगाढा रजनी चेयं निवृत्तश्च दिवाकर:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
सुव्रत! उठो, उठो, तुम्हारा कल्याण हो। जाओ और अपने माता-पिता से मिल आओ। सूरज डूब गया है और रात अँधेरी हो गई है।
 
‘Suvrata! Get up, get up, may you be blessed. Go and see your parents. The sun has set and the night has become dark.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)