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mahabharat 3.297.70: 'शुभ! मैं सिर के दर्द से इतना परेशान था कि ज़्यादा देर खड़ा नहीं रह सका और तुम्हारी गोद में सिर रखकर सो गया। मुझे ये सारी बातें एक-एक करके याद आ रही हैं।'   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  3.297.70 
शिरोऽभितापसंतप्त: स्थातुं चिरमशक्नुवन्।
तवोत्सङ्गे प्रसुप्तोऽस्मि इति सर्वं स्मरे शुभे॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
'शुभ! मैं सिर के दर्द से इतना परेशान था कि ज़्यादा देर खड़ा नहीं रह सका और तुम्हारी गोद में सिर रखकर सो गया। मुझे ये सारी बातें एक-एक करके याद आ रही हैं।'
 
‘Shubh! I was so troubled with the pain in my head that I could not stand for long that I fell asleep with my head on your lap. I am remembering all these things one by one. 70.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)