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mahabharat 3.297.61: सावित्री को यह वरदान देकर महाबली धर्मराज उसे वापस करके अपने लोक को चले गये।   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  3.297.61 
एवं तस्यै वरं दत्त्वा धर्मराज: प्रतापवान्।
निवर्तयित्वा सावित्रीं स्वमेव भवनं ययौ॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
सावित्री को यह वरदान देकर महाबली धर्मराज उसे वापस करके अपने लोक को चले गये।
 
After bestowing this boon to Savitri, the mighty Dharamraj returned her and went back to his own world. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)