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mahabharat 3.297.57: तुम्हारे साथ रहकर वह चार सौ वर्ष तक जीवित रहेगा और यज्ञों द्वारा भगवान की आराधना करके अपने धार्मिक आचरण के कारण सम्पूर्ण जगत में विख्यात होगा ॥57॥   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  3.297.57 
चतुर्वर्षशतायुश्च त्वया सार्धमवाप्स्यति।
इष्ट्वा यज्ञैश्च धर्मेण ख्यातिं लोके गमिष्यति॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे साथ रहकर वह चार सौ वर्ष तक जीवित रहेगा और यज्ञों द्वारा भगवान की आराधना करके अपने धार्मिक आचरण के कारण सम्पूर्ण जगत में विख्यात होगा ॥57॥
 
By staying with you he will live for four hundred years. By worshipping God through yagnas he will become famous in the entire world for his religious conduct. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)