Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.297.54: आपने मुझे सौ पुत्रों का वरदान दिया है और आप मेरे पति को ले जा रहे हैं; इसलिए मैं यह वर मांगती हूँ कि सत्यवान जीवित हो जाएँ, तभी आपकी बात सत्य होगी॥54॥ | mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वरातिसर्ग: शतपुत्रता मम
त्वयैव दत्तो ह्रियते च मे पति:।
वरं वृणे जीवतु सत्यवानयं
तवैव सत्यं वचनं भविष्यति॥ ५४॥
अनुवाद
आपने मुझे सौ पुत्रों का वरदान दिया है और आप मेरे पति को ले जा रहे हैं; इसलिए मैं यह वर मांगती हूँ कि सत्यवान जीवित हो जाएँ, तभी आपकी बात सत्य होगी॥54॥
You have blessed me with a hundred sons and you are taking my husband away; therefore I ask for the boon that Satyavan should be alive, then your words will come true. ॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥