Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.297.36: इस संसार में प्रायः मनुष्य अल्पायु होते हैं, मनुष्यों की शक्तिहीनता सर्वविदित है। आप जैसे संत-महात्मा अपने शरणागत शत्रुओं पर भी दया करते हैं। (फिर वे हम जैसे असहायों पर दया क्यों नहीं करेंगे?)॥36॥ | mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस संसार में प्रायः मनुष्य अल्पायु होते हैं, मनुष्यों की शक्तिहीनता सर्वविदित है। आप जैसे संत-महात्मा अपने शरणागत शत्रुओं पर भी दया करते हैं। (फिर वे हम जैसे असहायों पर दया क्यों नहीं करेंगे?)॥36॥
Usually people in this world have short lives, the powerlessness of humans is well known. Saints and great souls like you show mercy even to their enemies who come to them for refuge. (Then why won't they show mercy to helpless people like us?)॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥