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mahabharat 3.297.29: सावित्री बोली, "पति के पास रहते हुए मैं कैसे थक सकती हूँ? जहाँ मेरे पति रहते हैं, वहीं मेरा गंतव्य निश्चित है। जहाँ आप मेरे प्रियतम को ले जायेंगे, मैं भी वहीं जाऊँगी। देवेश्वर! कृपया मेरी बात पुनः सुनिए।"   |   mahabharat अध्याय 3.297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 297: सावित्री और यमका संवाद, यमराजका संतुष्ट होकर सावित्रीको अनेक वरदान देते हुए मरे हुए सत्यवान‍्को भी जीवित कर देना तथा सत्यवान‍् और सावित्रीका वार्तालाप एवं आश्रमकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.297.29 
सावित्र्युवाच
श्रम: कुतो भर्तृसमीपतो हि मे
यतो हि भर्ता मम सा गतिर्ध्रुवा।
यत: पतिं नेष्यसि तत्र मे गति:
सुरेश भूयश्च वचो निबोध मे॥ २९॥
 
 
अनुवाद
सावित्री बोली, "पति के पास रहते हुए मैं कैसे थक सकती हूँ? जहाँ मेरे पति रहते हैं, वहीं मेरा गंतव्य निश्चित है। जहाँ आप मेरे प्रियतम को ले जायेंगे, मैं भी वहीं जाऊँगी। देवेश्वर! कृपया मेरी बात पुनः सुनिए।"
 
Savitri said, "How can I be tired while being near my husband? Wherever my husband lives, my destination is certain. Wherever you take my beloved, I will also go there. Deveshwar! Please listen to me again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)